भगवत गीता श्लोक hindi में / bhagwat geeta in hindi / hindimebook

bhagwat geeta in hindi
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नमस्कार दोस्तों आज हम जाने गे भगवत गीता  ( bhagwat geeta in hindi ) के बारे में भगवत गीता हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा ग्रन्थ मन जाता है भगवतगीता सार ( bhagwat geeta in hindi ) का वर्णन महाभारत में श्री कृष्ण अर्जुन को सुनाया था श्रीमद्भागवत गीता को अर्जुन के लावावा धर्तराष्ट और संजय ने भी सुनी थी

 

दोस्तों इसी को देखते हुए अब हम गीता अध्धाय2 की सुरूआत करते है और जानते है भावत गीता ( bhagwat geeta in hindi ) के अध्धाय दो में क्या बतया गया है अध्धाय

 

भगवत गीता के अध्धाय 2 के श्लोक नंबर 1 में क्या बताया गया है

1.

संजय कहते हैं उस प्रकार करुणा से भरे हुए और आंसुओं से पूर्ण तथा व्याकुल नेत्रों वाले शोक युक्त सर जून को भगवान देखते हैं इस दुख से घिरा हुआ है आशा खत्म हो चुकी है हिम्मत टूट चुकी है और ऐसे में कृष्ण उसे समझाना शुरू करते हैं जहां युद्ध का वर्णन होना चाहिए था वह दुख और विषाद का माहौल है अर्जुन की आंखों में आंसू मन में निराशा है यह बहुत बड़ी हैरानी की बात थी धृतराष्ट्र या संजय कोई भी इसकी आशा नहीं कर रहे थे अर्जुन का दुख देखकर उत्तर देने के लिए तैयार होते हैं दोस्तों यह गीता अर्जुन यह हम सब की शंका और ऐश्वर्या कृष्ण का ज्ञान

 ( bhagwat geeta in hindi )

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भगवत गीता के अध्धाय 2 के श्लोक नंबर 2 में क्या बताया गया है

2.

श्री भगवान बोलते हैं कि अर्जुन तुझे इस समय और समय में यह मोह किस हेतु से प्राप्त हुआ क्योंकि ना तो यह श्रेष्ठ पुरुषों के द्वारा आ चरित है न स्वर्ग को देने वाला है और ना किसी को करने वाला ही है युद्ध के समय ऐसी शंका यह तो समय है दोस्तों इस तरह अपने शत्रुओं के प्रति मुंह दिखाने का काम अर्जुन जैसे योद्धा कैसे कर सकते हैं अपने कर्म से अगर हम मुंह मोड़ कर लो भैया किसी और वजह से हताश बैठ जाएं तो वह ठीक नहीं है इससे कभी कोई लाभ नहीं होता

 

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भगवत गीता के अध्धाय 2 के श्लोक नंबर 5 में क्या बताया गया है

5.

अर्जुन की दुविधा गलत नहीं लगती जब वह ऐसा कहते हैं कि इन महानुभाव गुरुजनों को न मारकर मैं इस लोक में भिक्षा का अभी खाना कल्याण कारक समझता हूं यहां पर अर्जुन कहते हैं कि इन गुरुजनों को मारकर इस दुनिया में किसी भी तरह का लाभ ले लूं उसका क्या मतलब है अपने इन लोगों को मारकर उससे अर्थ और भाव धना धन ऐश्वर्य यह सब तो में प्राप्त कर दूंगा परंतु ऐसे लोगों से क्या प्राप्त होगा 

 

दोस्तों अर्जुन ही नहीं दुनिया में ना जाने कितने लोग ऐसे होते हैं जिन्हें लगता है कि परिवार भी ना छूटे और मोक्ष भी प्राप्त हो जाए परंतु यह तो संभव नहीं

 ( bhagwat geeta in hindi )

 

 

भगवत गीता के अध्धाय 2 के श्लोक नंबर 7 में क्या बताया गया है

7.

इसलिए कायरता रूप दोष दे उपत हुए स्वभाव वाला तथा धर्म के विषय में मोहित स्थित हुआ मैं आपसे पूछता हूं कि जो साधन निश्चित कल्याण कारक हो वह मेरे लिए चाहिए क्योंकि प्रभु मैं आपका शिष्य हूं 

 

दोस्तों कमजोर क्षणों में हम डर जाते हैं जिससे कंफ्यूजन का भाव हमारे अंदर आता है अर्जुन यह मान रहे हैं कि वह कंफ्यूज दे कायरता का दोष हुआ अपने ऊपर ले रहे हैं और तभी तो यह कहते हैं कि श्रीकृष्ण मैं आप का स्टूडेंट हूं आपको सेंड करता हूं मुझे बताइए कि क्या सही है विधा के समय गुरु ही एकमात्र सहारा होता है दोस्तों और गुरु के सामने कुछ भी छुपाना नहीं चाहिए खुलकर अपनी बात अपना भाई अपनी शंका सब कुछ सामने रख देना चाहिए अगर ऐसा करेंगे तभी तो आपको मार्गदर्शन मिलेगा ( bhagwat geeta in hindi )

 

 

भगवत गीता के अध्धाय 2 के श्लोक नंबर 8 में क्या बताया गया है

8.

अर्जुन आगे कहते हैं जीतने पर उन्हें जमीन मिल जाएगी धन-धान्य मिलेगा नाम होगा लेकिन इन सब के मिलने के बाद उनका यह दुख कम नहीं होगा जो उन्हें अभी महसूस हो रहा है 

 

यही बात है दोस्तों जब अपनों का दुख सताता है तो किसी भी तरह का लाभ आराम नहीं देता और उससे भी बड़ी बात अगर आप चौक में है दुख में हैं तो जब तक उस दुख को दूर नहीं करेंगे उसकी वजह ढूंढ नहीं लेंगे उसका उपाय नहीं ढूंढ लेंगे दुनिया का कोई भी सुख आपको आराम नहीं दे पाएगा

 

 

 

भगवत गीता के अध्धाय 2 के श्लोक नंबर 9 में क्या बताया गया है

9.

संजय धृतराष्ट्र को बोलते हैं हे राजन निद्रा को जीतने वाले अर्जुन अंतर्यामी श्री कृष्ण को फिर से कहते हैं मैं युद्ध नहीं करूंगा यह स्पष्ट कह कर चुप हो जाते हैं 

 

यानी निद्रा हमारी नेशनल आवश्यकता है इस पर दुनिया में कोई भी विजय नहीं पाया लेकिन अर्जुन को ऐसा महान माना जाता था कि उसने निद्रा पर भी विजय प्राप्त कर दी थी और वही अर्जुन निद्रा तो नहीं अपने मुंह अपने डर और दुख से हारता हुआ दिख रहा है किस समय कौन से दुर्बलता हम पर हावी हो जाए और कुछ समय के लिए हम उससे हार मान ले यह कहना बड़ा मुश्किल है जब अर्जुन के साथ ऐसा हुआ है दोस्तों तो हमारे साथ भी हो सकता है लेकिन उस दुर्बलता को जीत के आगे बढ़ाता और उसी तरह से हमें भी बढ़ना होगा

 

 

 

भगवत गीता के अध्धाय 2 के श्लोक नंबर 13 में क्या बताया गया है

13.

कृष्ण जीवन का खेल समझाते हुए कहते हैं जिनसे जीवात्मा की किस देश में बालक पन जवानी और वृद्धावस्था होती है 

 

वैसे ही अन्य शरीर की प्राप्ति होती है इस विषय में धीर पुरुष मोहित नहीं होता हमारी आत्मा तो वही रहती है लेकिन शरीर बचपन से बुढ़ापे तक बदलता है वैसे ही नए जन्म में नया शरीर मिलता है दोस्तों कृष्ण कहते हैं कि बदलाव प्रकृति का नियम है जो अभी है वह अगले पल बदल चुका है आपको चाहे वह दिखे या ना दिखे आप उसे महसूस करेंगे ना करें जब बदलाव नियम है ऐसे नियम के लिए दुखी क्यों हो ना जो नहीं बदलता उसे कहते हैं आत्मा आत्मा को ध्यान से समझ लीजिए शरीर बनता है दोस्तों आत्मा कभी नहीं बदलती

( bhagwat geeta in hindi )

 

भगवत गीता के अध्धाय 2 के श्लोक नंबर 18 में क्या बताया गया है

18.

बड़ी सच्चाई है हमारी आत्मा जो मरती नहीं बाकी सब कुछ हमारा चली जा हमारे भाव है जो मर जाते हैं कृष्ण कहते हैं भारतवंशी अर्जुन युद्ध कर क्योंकि आत्मा अमर पेश करना संभव नहीं इसीलिए सबसे बड़ी सच्चाई कहा गया है महापुरुष इसी ज्ञान इसी आत्मा को समझने में अपना पूरा जीवन सन्यास में समाधि मैदान में बिता देते हैं कृष्ण का कहना है कि शरीर नाशवान है और आत्मा अमर है और वही सच्चाई है तो शोक किस बात का करना

 

 

 

भगवत गीता के अध्धाय2 के श्लोक नंबर 19 में क्या बताया गया है

19.

जो इस आत्मा को मारने वाला समझता है तथा जो इसको मरा हुआ मानता है वह दोनों ही नहीं जानते सच्चाई को क्योंकि यह आत्मा वास्तव में ना तो किसी को मारती है और न किसी के द्वारा मारी जाती है अर्थात आत्मा सिर्फ होती है उसका होना ही सच है बाकी कुछ नहीं यह तो अज्ञान ही है जो हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमने किसी को मार दिया यह मार देंगे लोग अपने अहंकार में ऐसा समझते हैं कि मैं बहुत कुछ कर सकते हैं यह बहुत कुछ कर चुके हैं यह सिर्फ उनकी नादानी है अज्ञानता है

 

 

भगवत गीता के अध्धाय 2 के श्लोक नंबर 23 में क्या बताया गया है

23.

इस आत्मा को शस्त्र नहीं काट सकते हैं इसको आज नहीं चला सकती इस को जेल नहीं कल आ सकता और भाइयों सुखा नहीं सकती आपका कोई वस्तु नहीं कट जाए जल जाए अशोक जाए आत्मा के इसी स्वरूप कृष्ण समझा रहे हैं जैसे कपड़ा पड़ता है कल जाता है उसी तरह से आत्मा को कोई वस्तु समझना भूल होगी उस आत्मा को अपनी इस दुनिया की किसी चीज से मतों लिए आत्मा किसी के भी जैसी नहीं उसका कोई दूसरा उदाहरण संभव ही नहीं आत्मा अपने आप में फिर भी और अनूठी है हम से पहले भी थी और आगे भी रहेंगी


 

भगवत गीता के अध्धाय 2 के श्लोक नंबर 24 में क्या बताया गया है

24.

यह आत्मा अछेद हैं इसे छेदा नहीं जा सकता यह आत्मा अदा किया है इसे चलाया नहीं जा सकता अब कृत्य है मतलब गीला भी नहीं किया जा सकता और निस्संदेह अशोक से है मतलब इसे सुखाया भी नहीं जा सकता यह आत्मा नित्य सर्वव्यापी चल फिर रहने वाली और सनातन सनातन का अर्थ क्या होता है दोस्तों जो हमेशा है और हमेशा रहेगा वही आत्मा भी हैं श्रीकृष्ण के बताना चाहते हैं कि हम जो नाशवान है मतलब हमारा जो यह शरीर है इस पर ज्यादा ध्यान ना दें हम समझे आत्मा को जिस का नाश नहीं हो सकता तभी हमें मुक्ति मिलनी संभव हो सकती है वरना मुंह और दुविधा में हम हमेशा हंसते रह जाएंगे जैसे कि अभी अर्जुन फंसा हुआ है और अपना कर्म करने को तैयार ही नहीं

 

 भगवत गीता के अध्धाय 2 के श्लोक नंबर 25 में क्या बताया गया है

25.

आत्मा का स्वरूप अव्यक्त है मतलब इससे व्यक्त नहीं कर सकते समझा नहीं सकते इसको अचिंत्य कहते हैं इसको आप सोच भी नहीं सकते यह आत्मा विकार रहित है आत्मा में कोई कमी नहीं होती दोस्तों कृष्णा आगे कहते हैं कि हे अर्जुन इस आत्मा को उपर्युक्त प्रकार से जान तू शोक करने के योग्य नहीं है अर्थात तुझे शोक करना उचित नहीं है आत्मा अव्यक्त इसलिए है क्योंकि इस आत्मा को हम अपनी इंद्रियों से नहीं समझ सकते इंद्रियां इस दुनिया के लिए है और इंद्रियों से हम हैप्पीनेस ने सर्दी गर्मी खाना-पीना एक्टिविटीज करते हैं आत्मा इन सबसे परे

 

 

भगवत गीता के अध्धाय 2 के श्लोक नंबर 26 में क्या बताया गया है

26.

आत्मा का ज्ञान कृष्ण अर्जुन को इसलिए दे रहे हैं कि 

वो जिनके लिए शो कर रहा है वह व्यर्थ है कृष्ण समझाते हैं कि हे अर्जुन यदि तो इस आत्मा को जन्म लेने वाली तथा सदा मरने वाली मानता है तो हे महाबाहो तो इस प्रकार शोक करने के योग्य नहीं है दोस्तों अगर अर्जुन आत्मा को जन्म लेने वाला और मरने वाला समझता है तो भी शोक करने का कोई अर्थ नहीं है अगर अर्जुन आत्मा को शरीर की तरह ही जन्म लेने वाला और मरने वाला समझता है तो भी युद्ध में मरने वालों के लिए शोक करने का कोई मतलब नहीं

 

 

भगवत गीता के अध्धाय 2 के श्लोक नंबर 27 में क्या बताया गया है

27.

कृत्य कहते हैं कि हे अर्जुन अगर तुम के मानते हो किचन में हुए की मृत्यु निश्चित है और मरे हुए का जन्म निश्चित है तो इससे भी इस बिना उपाय वाले विषय में तुम्हें शोक करने का कोई हक नहीं है जन्म और मृत्यु तो जुड़े हैं एक के बाद दूसरे का होना तो फिर शोक क्यों करना इसका जन्म हुआ उसका अंत तो निश्चित है और अगर आत्मा ने जन्म लिया है तो उसका मरना भी निश्चित है यहां यह कह रहे हैं कि ना जाने कितनी ही बार हम उन बातों के लिए शोक करते हैं जिसका होना यह समझदारी नहीं है जो तय है तो होगा और जो होगा ही तो उसके लिए शोक करके अपने आप को कमजोर या दुर्बल बनाने की क्या आवश्यकता है

 ( bhagwat geeta in hindi )

 

भगवत गीता के अध्धाय 2 के श्लोक नंबर 28 में क्या बताया गया है

28.

हे अर्जुन संपूर्ण पुरानी जन्म से पहले प्रकट थे और मरने के बाद भी प्रकट हो जाने वाले हैं केवल बीच में ही प्रकट है फिर ऐसी स्थिति में शोक क्या करना हमारा होना किसी का भी हो ना उनके जन्म और मृत्यु के बीच में होता है तो फिर शोक किस के लिए करना अचानक से एक जन्म होता है जब कोई नहीं था तो वह एक नया खेल खिलाता हुआ नया जीवन आता है खुशियां लिए हुए लेकिन उसके साथ ही किसी के जाने की भी तैयारी शुरू हो गई है ऐसा तो हो नहीं सकता कि हम अच्छे को स्वीकार करें और बुरे के लिए शोक मनाते रहे जीवन के सच को हमें मानना पड़ेगा


 

भगवत गीता के अध्धाय 2 के श्लोक नंबर 30 में क्या बताया गया है

30.

हे अर्जुन ये आत्मा सब के शरीर में सदा ही अवधेश कारण संपूर्ण प्राणियों के लिए तो शौक करने के योग्य नहीं है अवध जाने आत्मा का वध करना संभव नहीं है जब आत्मा को कोई मार ही नहीं सकता और आत्मा ही एक सच है तो तू तो किसके लिए कर रहा है दोस्तों सबसे बड़ी बात जो सामने आती है वह यह आत्मा को समझें कैसे इसको समझना ही मोक्ष की प्राप्ति है

 ( bhagwat geeta in hindi )

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धन्यबाद

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