Bhagwat Geeta Saar in Hindi ? भगवद् गीता का पूरा सार बस कुछ मिनट में / hindimebook

Bhagwat Geeta Saar in Hindi
Bhagwat Geeta Saar in Hindi


Bhagwat Geeta Saar in Hindi मैंने श्रीमद्भागवत गीता तब तक नहीं पड़ी थी जब तक मुझे यह ज्ञान नहीं हुआ कि हम सब आत्माएं और यह जिंदगी हम आत्माओं के लिए एक इम्तिहान है 


Bhagwat Geeta Saar in Hindi

 अपने अंदर से अपने सबसे अच्छे रूप को बाहर निकालने का और भगवत गीता (Bhagwat Geeta Saar in Hindi) इस इम्तिहान को पास करने की एक अहम किताब भगवत गीता (Bhagwat Geeta Saar in Hindi) के 18 अध्याय हैं और यह संस्कृत में परमात्मा द्वारा दी गई थी समय के साथ संस्कृत भाषा रोजमर्रा की जिंदगी से निकल गई और यह ज्ञान मनुष्य से दूर हो गया समय-समय पर भगवत गीता (Bhagwat Geeta Saar in Hindi) के साधारण नसों में अनुवाद किया गया (Bhagwat Geeta Saar in Hindi)

 

इसी कोशिश को आगे बढ़ाते हुए आने वाले 9 मिनट में भगवत गीता (Bhagwat Geeta Saar in Hindi) के कुछ हिस्सों को अपने गुरु के आशीर्वाद से एक आसान रूप में मैं अपने साथ बिलियन भाई बहनों के चरणों में समर्पित कर रहा हूं

यह ज्ञान परमात्मा ने भगवान कृष्ण के द्वारा सबसे बड़े धर्म युद्ध महाभारत की रणभूमि कुरुक्षेत्र में अर्जुन को कुछ 5000 साल पहले जब धर्म का बार-बार उल्लंघन हुआ परमात्मा का डर मनुष्य से निकल गया लालच की होड़ में भाई ने भाई को मारने की कोशिश और यही नहीं एक बात और उसको भरी सभा में अपने बड़ों के सामने अपमानित किया

 

इससे पहले कि मनुष्य जाति धर्म से निकलकर पूर्ण रूप से कलयुग में जाति युद्ध की रणभूमि में युद्ध से कुछ परमात्मा ने गीता भगवान कृष्ण के द्वारा मनुष्य जाति के कल्याण के लिए ऐसे ही जैसे कविता मॉस्को गोश्त को और कुरान कुरान गुरु ग्रंथ साहिब परमात्मा द्वारा दी गई किताबें जो किसी एक धर्म के लिए नहीं बल्कि पूरी मनुष्य जाति के लिए पूरी इंसानियत के लिए सब आत्माओं के लिए क्योंकि यह आत्मा को परमात्मा के बारे में उसकी सृष्टि के बारे में और सबसे हम एवं कायदों के बारे में समझ आती है

 

जिनका आत्मा को मनुष्य के रूप में हर हाल में पालन करना हो रक्षा करनी होगी और इन्हीं कायदों की बुनियाद पर एक आत्मा को शरीर त्यागने के बाद रखा जाए और इस परीक्षा से पास होने पर हमेशा के लिए जन्म और मृत्यु से मुक्ति मिलेगी परमात्मा भगवत गीता में कहते हैं कि मैं ही सब की शुरुआत हूं

 

मैं शुरू से भी पहले था और सब खत्म होने के बाद भी रहूंगा सब मौज में है और मैं सब में जो भी तुम छू सकते हो देख सकते हो जग सकते हो या सुन सकते हो वह सब माय यह नदियां पहाड़ सूरज ग्रहण चांद सितारे सब मैंने बनाए मैंने हीं भगवान शैतान राक्षस और इंसान बनाए सर्वव्यापी सब में रहता हूं सब में मैं हूं मैं हूं मैं हूं ब्रह्मा बनके सब बनाता हूं

 

और सब नष्ट करता हूं मैं यूं ही बनाता रहूंगा ताकि आत्माओं को मौके मिल सके जन्म और मृत्यु से 1 दिन मोक्ष पाने को हमेशा के लिए परमात्मा के साथ रहने भगवत गीता (Bhagwat Geeta Saar in Hindi) कहती है की सबसे बड़ी परीक्षा के लिए परमात्मा ने प्रकृति का निर्माण  तक हवा अग्नि जल पृथ्वी और इधर से किया जिन्हें हम छू के चक्के सुनके देखके समझ सकते हैं

 

और खुद परमात्मा इन


अर्जुन ने पर्मतमाँ को देखने के लिए क्या किया ?

 

Bhagwat Geeta Saar in Hindi
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अर्जुन को भी परमात्मा का विराट रूप देखने के लिए भगवान कृष्ण ने दिव्य नेत्र भागवत गीता समझाती है

कि आत्मा अजन्मी इसे कोई मार नहीं सकता कोई जला नहीं सकता तोबा नहीं सकता काट नहीं सकता लेकिन आत्मा को परमात्मा के साथ हमेशा रहने के लिए यह परीक्षा रुपी जीवन में बैठना ही पड़ेगा इस परीक्षा के लिए परमात्मा से बिछड़ के आत्मा को पृथ्वी पर किसी ना किसी रूप में जन्म लेना पड़ता है

 

और 88 करोड़ जैनियों को जीने और मरने के बाद आत्मा को मनुष्य का शरीर और दिन अब से बड़ी मर्यादाओं की परीक्षा में बैठने के लिए हर मनुष्य को विश पूरी परीक्षा के दौरान तरह-तरह की अच्छी और बुरी भावनाओं के चक्रव्यूह में अपने ही भाई-बहन मित्रों के साथ डाला जाता है

 

जिसमें हर आत्मा को अपने अंदर के काम से और आज से कब गुणों से निकल के सात्विक जीवन में प्रवेश करने के मौके हमारे नाम से गुण वह है जो हमारे अंदर की भावना पैदा करके हमें खुद को उदास और नुकसान पहुंचाते हैं और हमारे राज्सेखरण हमें ईर्ष्यालु और जो भी बना कर दूसरों के प्रति नुकसान पहुंचा सकते परीक्षा के दौरान हर आत्मा को तामसिक राजसिक गुणों को खत्म करके अपने साथ दिनों से परिचित होना पड़े सात्विक गुणों है



 धर्म के बारे में क्या बताया गया है ?


जो आत्मा को अपने आसपास की हर चीज से जुड़े और उन्हें प्यार करना सिखाते हैं परीक्षा के दौरान हर आत्मा को जीवन के चारों धर्म अर्थ काम और मोक्ष का ज्ञान पाकर यही बुधवार की आत्मा परमात्मा को समझ सकती 


धर्म का पहला द्वार 

पहला द्वार धर्म का है और शेष का प्रतीक है धर्म वही है जो गीता में लिखा हुआ है वेदों में दिखाओ बाइबल या कुरान में लिखा हुआ है

 

धर्म वहीं है जो धारण किया हुआ जैसे आपका दिल मांगता है जैसे झूठ नहीं बोलना चोरी नहीं करना भगवान का निरादर नहीं करना दूसरों को नुकसान नहीं देना यही सब और हर आत्मा को अपने जीवन काल में हर समय धर्म का पालन करना होगा और उसकी रक्षा करनी 


धर्म का दुसरा द्वार 

दूसरा द्वार अर्थ का है और घोड़ा इसका प्रतीक है और आत्मा अपने हर जीवन काल में अपने पृथ्वी पर होने का अर्थ एवं मूल कारण समझेगी जिंदगी में उगने वाली चीजें और रिश्तो का आनंद ले कि अच्छा बेटा अच्छी बेटी अच्छा भाई अच्छी बहन अच्छा पति अच्छी पत्नी बन के हर दुनिया भी रिश्ते पर खरी उतरेगी और इस परीक्षा को पास करेगी 


धर्म का तीसरा द्वार 

तीसरा द्वार काम का है भगवत गीता (Bhagwat Geeta Saar in Hindi) समझाती है कि हर मनुष्य के अंदर काम क्रोध लोभ मोह अहंकार और ईशा जैसी भावनाएं हमें अपने और दूसरों के प्रति नुकसान पहुंचा सकती है इन भावनाओं को हर मनुष्य को हमेशा अपने नियंत्रण में रखना होगा क्योंकि इनके बाहों में किया हुआ कोई भी काम हमारे जीवन भर की परेशानी का कारण बन सकता है और एक आत्मा संतोष और सादगी से इन भावनाओं पर हमेशा के लिए विजय पा सकती है

 

धर्म का चोथा द्वार

चौथा द्वार  मनुष्य हर समय कुछ इच्छाएं रखता है कुछ इच्छाएं एक ही जन्म काल में पूरी हो जाती हैं और कुछ अधूरी रह जाती हैं और उनके पूरा होने के लिए आत्मा को वापस पृथ्वी पर आना पड़ता है भगवतगीता समझाती है कि हमारी इच्छाएं ही मूल कारण है

 

हमारे पृथ्वी पर वापस आने का और अगर हम कोई भी इच्छा ना रखें तो हम इस जीवन और मृत्यु से मुक्त हो सकते हैं यह द्वार माफी का भी है जिन्होंने आपके साथ बुरा किया उनको माफ करके और जिन से आपने बुरा किया उनसे माफी मांगकर मुक्ति पाई जा सकती है

 

जब तक आत्मा इन चारों दरवाजों धर्म अर्थ काम और मोक्ष को समझ नहीं लेती तब तक आत्मा को बार-बार इस मनुष्य रूप में आना ही पड़ेगा परीक्षा का समय खत्म होते ही आत्मा शरीर और अन्य सब वस्तुओं का त्याग कर देती है जो भी संसार में रहकर बनाया वह किसी और का हो और आत्मा अपने कर्मों के फैसले के लिए चली जाती है आत्मा के अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब होता है

 

अपने अच्छे कर्मों के लिए आत्मा को स्वर्ग और दुष्कर्म के लिए जाती है आत्मा को अपने पापों की सजा खत्म होने के बाद आत्मा को शरीर और दिमाग मिलता है इस परीक्षा में फिर से बैठने के लिए और हर परीक्षा में वही सब कराया जाएगा जिंदगी के चार स्तंभ धर्म अर्थ काम और मोक्ष को समझने के हर जन्म में अपने कई जन्मों के कर्मों के हिसाब से हर आत्मा को कभी अच्छा और कभी बुरे हालातों से जाना पड़ता है

 

लेकिन जब तक आत्मा परमात्मा के साथ योग को नहीं समझ लेती मुक्ति नहीं सकती बताती है कि मनुष्य अपने शरीर दिमाग से भगवान को पा सकता है शरीर द्वारा किए कर्मों के माध्यम से परमात्मा को पाने को कर्म योग कहते हैं ऐसे कर्म जो परमात्मा की इच्छा से हो और दूसरों के कल्याण के लिए वाल्मीकि ने रामायण में श्रवण ने अपने माता-पिता की सेवा और ने चार धाम की यात्रा करवा कर मदर टेरेसा ने अपने प्यार और सेवा के माध्यम से और मैडम की खोज में अपने जीवन का बलिदान दे अपने कर्मों द्वारा परमात्मा को पाती है दिमाग से भी परमात्मा के साथ योग लगा सकती है

 

इसे राजा दिमाग या मस्तिष्क इंद्रियों का राजा एक मनुष्य अपनी आस्था सांस प्रणाली अभ्यास साधना और तपस्या से परमात्मा को योग के रास्ते पा लेता है इसको समझने के लिए हमें अपने अंदर की एनर्जी यानी चकरा और कुंडलिनी को समझना पड़ेगा आत्मा मस्तिष्क से मेडिटेशन ध्यान लगाकर परमात्मा के साथ योग लगा सकती शंकराचार्य स्वामी परमहंस स्वामी विवेकानंद और उनके जैसे योगी योग के रास्ते परमात्मा के साथ संधि लगा पाए भगवत गीता (Bhagwat Geeta Saar in Hindi) में कहते हैं कि

 

अगर किसी आत्मा को धर्म ना भी समझ आए योग ना भी समझ आए शरण में आ जाए तो मैं उसके सारे पाप माफ कर देता हूं परमात्मा को दिल की गहराइयों से पुकार के पाने को भक्ति योग कहते हैं चैतन्य महाप्रभु मीराबाई और भगवान हनुमान इस योग के सबसे बड़े उदाहरण लेकिन कभी आत्मा अपने होने का मूल कारण भूल के धर्म का उल्लंघन करें या पाप के रास्ते पर निकल जाए तो उसे ठीक करने के लिए परमात्मा खुद किसी रूप में पृथ्वी पर जन्म लेते आइए श्री भगवत गीता (Bhagwat Geeta Saar in Hindi) गुरु ग्रंथ साहिब पुरा बाइबल कुरान या किसी भी धर्म किताब को पूरा पढ़कर जिंदगी की असली मां में समझें और परमात्मा के साथ योग लगाएं अगर आप ने इसे पसंद किया ताकि सब आत्माएं अपने यहां होने का मूल रूप समझ सके और जन्म और मृत्यु से मुक्ति पाकर हमेशा परमात्मा के साथ रह सके

 (Bhagwat Geeta Saar in Hindi)

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धन्यवाद

 


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