चाणक्य निति का ये बाते आप को जरूर जानना चाहिए / Chanakya niti in hindi /hindi me book

 

Chanakya niti in hindi
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Chanakya niti in hindi

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दोष किसके कुल में नहीं है कौन ऐसा है जिसको आज तक दुखने कभी ना सताया हो अवगुण किसे प्राप्त नहीं हुए सदा के लिए सुखी कौन रहता है Chanakya niti in hindi

 

अर्थ कोई भी व्यक्ति परिपूर्ण यह संपूर्ण सर्वगुण संपन्न नहीं है सभी के जीवन में सुख और दुख दोनों ही आते हैं और जाते हैं Chanakya niti in hindi

मनुष्य का आचरण व्यवहार उसके खानदान को बताता है उसकी बोली से उसके देश का पता चलता है विशेष आदर सत्कार से उसके प्रेमभाव का पता चलता है तथा उसके भोजन से तथा उसके शरीर से उसके भोजन का पता चलता है Chanakya niti in hindi

 

कन्या का विवाह अच्छे कुल में करना चाहिए पुत्र को विद्या के साथ जोड़ना चाहिए दुश्मन को विपत्ति में डालना ही चाहिए और मित्रों को अच्छे कार्यों में ही लगाना चाहिए

 

 दुर्जन और सांप सामने से आने पर सांप का वर्णन करना उचित है यदि सांप और दुर्जन व्यक्ति दोनों ही आ रहे हो तो आचार्य चाणक्य के अनुसार आम का वर्णन करना अर्थात को स्वीकार करना शाम को एक्सेप्ट करना ही उचित है क्योंकि स्टाफ केवल एक ही बार डसेगा और जो दुर्जन व्यक्ति है वह आपको बार-बार डासे गा Chanakya niti in hindi


राजा खानदानी लोगों को ही अपने पास एकत्रित करता है क्योंकि कुलीन या अच्छे खानदान वाले लोग ही प्रारंभ में मध्य में और अंत में राजा के साथ ही रहते हैं अर्थ राजा के ऊपर कैसे भी विपत्ति आने पर राजा का साथ नहीं छोड़ते


प्रलय काल में सागर भी अपनी मर्यादा को नष्ट कर देता है परंतु साधु लोग प्रलय के काल आने पर भी अपनी मर्यादाओं को नष्ट नहीं करते या अपनी मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं करते


मूर्ख व्यक्ति से बचना चाहिए यह प्रत्यक्ष में दो पैरों वाला पशु है जिस प्रकार बिना आंख अर्थ अंधे व्यक्ति को कांटे भेजते हैं उसी प्रकार मूर्ख व्यक्ति अपने कटु और अज्ञान भरे वचनों से बार बार भेदता है


रूप और यौवन से संपन्न तथा उच्च कुल में जन्म लेने वाला व्यक्ति यदि विद्या से रहित है तो वह बिना सुगंध के फूल की भांति ही किसी भी कार्य का नहीं है और वह उस फूल की भांति ही कहीं पर भी शोभा प्राप्त नहीं करता


कोयल की शोभा उसके स्वर में है स्त्री के स्वभाव उसके पतिव्रत धर्म में है ग्रुप व्यक्ति की शोभा उसकी विद्या में है और तपस्या की शोभा क्षमा करने में है किसी एक व्यक्ति को त्यागने से यदि कुल की रक्षा होती है तो उसे छोड़ देना चाहिए पूरी गांव की भलाई के लिए कुल को तथा देश की भलाई के लिए गांव को और अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए सारी पृथ्वी को ही छोड़ देना चाहिए


उद्योग व्यापार या धंधा करने पर निर्धनता नहीं रहती प्रभु का नाम जप करने वालों का पाप नष्ट हो जाता है चुप रहने वाले यह सहनशीलता रखने वाले लोगों पर लड़ाई और झगड़े नहीं आते और वह जागता रहता है हर सदा ही वह चेतन या जागृत अवस्था में सभी प्रकार के वनों से या दरों से दूर रहता


अति सुंदर होने के कारण सीता का हरण हुआ अधिक इंकार करने के कारण रावण मारा गया अधिक दान देने के कारण राजा बलि बांधा गया अभी के लिए अति उचित नहीं है अति को सदैव त्याग करना चाहिए हमेशा ही मध्य मार्गी या मध्य में रहना चाहिए


समर्थकों भार कैसा व्यवस्था ही के लिए कोई भी स्थान दूर नहीं विद्वान के लिए विदेश कैसा मधुर वचन वचन बोलने वालों का शत्रु कौन हो सकता है 


एक ही सुगंधित फूल वाले वृक्ष है जिस प्रकाश सहारा वन सुगंधित हो जाता है उसी प्रकार एक सुपुत्र से सारा कुल या सारा खानदान ही शोभा आता है


आग से जलते हुए सुखी वृक्ष से सहारा वन जल जाता है वैसे ही एक नालायक पुत्र से सारा कुल नष्ट हो जाता है


जिस प्रकार चंद्रमा से रात्रि की शोभा होती है उसी प्रकार सुपुत्र यह साधु प्रकृति वाले पुत्र से पूरा कुल या खानदान आनंदित और प्रसन्न हो उठता है


 सुख और दुख देने वाले बहुत से पुत्रों को पैदा करने से क्या लाभ कुल को आश्रय देने वाला तो एक ही पुत्र सबसे अच्छा या एक ही पुत्र काफी होता है


पुत्र से 5 वर्ष तक प्यार करना चाहिए उसके बाद 10 वर्ष से 15 वर्ष की आयु तक उसे दंड आदि देते हुए अच्छे कार्यों में लगाना चाहिए Chanakya niti in hindi


 

 सोलवा साल आने के बाद उसके साथ मित्रता के जैसा व्यवहार करना चाहिए संसार के सभी अच्छे और बुरे मार्गों का या अच्छे और बुरे कर्मों की पूरी जानकारी उसको मित्रता के भाव से देनी चाहिए

 

देश में उपद्रव भयनाक उपद्रव होने पर शत्रु के आक्रमण के समय अकाल के समय दुष्ट का साथ होने पर जो व्यक्ति भाग जाता है वही जीवित रहता है

 

जिसके पास धर्म अर्थ काम और मोक्ष इनमें से एक भी ना हो उसके लिए अनेक जन्म लेने का फल केवल मृत्यु ही होता है

 

जहां मूर्खों का सामान नहीं होता जहां आनंद भंडार सुरक्षित रहता है जहां पति पत्नी में कभी झगड़ा नहीं होता वहां लक्ष्मी बिना बुलाए ही बात करती है Chanakya niti in hindi

 

Chanakya niti in hindi
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चाणक्य नीति चौथा अध्याय

 

 शरीर धारी जीव के गर्व काल के समय में ही उसकी आयु कर्म धनं विद्या और मृत्यु इन पांचों चीजों का निर्णय भी तय हो जाता है Chanakya niti in hindi

 

साधु महात्माओं के सत्संग से पुत्र मित्र बंधु और जो अनुराग करते हैं वह संसार चक्र से छूट जाते हैं उनके कुल धर्म से उनका कुल उज्जवल हो जाता है

 

 जिस प्रकार मछली देखरेख से कछुआ चिड़िया स्पर्श से सदैव अपने बच्चों का पालन-पोषण करते हैं वैसे ही अच्छे लोग सदा हमारे साथ रहकर हमारी रक्षा करते हैं Chanakya niti in hindi

 

 

अगला सूत्र चाणक्य का उन लोगों के लिए है जो लोग बार-बार यह कहते हैं कि अभी बहुत समय पड़ा है या भक्ति पूजा-पाठ अच्छे कर्म सत्कर्म बुढ़ापे में करेंगे उनके लिए चाणक्य कहते हैं

 

यह नश्वर शरीर जब तक निरोग्य स्वस्थ है या जब तक मृत्यु प्राप्त नहीं होती तब तक मनुष्य को अपने सारे पुण्य कर्म कर लेने चाहिए क्योंकि अंत समय में वह कुछ भी करने लायक नहीं बचता

 

विद्या कामधेनु के समान सभी इच्छाओं इच्छाएं पूर्ण करने वाली है विद्या से सभी फल समय पर प्राप्त होते हैं प्रदेश में विद्या ही माता के समान रक्षा करती है विद्वानों ने विद्या को गुप्त धन की परिभाषा दी है

इसका ना तो हरण किया जा सकता है और ना ही चुराया जा सकता है

 

सैकड़ों अज्ञानी पुत्रों से एक ही गुणवान पुत्र अच्छा है रात्रि का अंधेरा दूर करने के लिए एक चंद्रमा ही काफी होता है

 

हजारों सारे भी मिलकर रात्रि के अंधेरे को नहीं मिटा सकते

 

 बहुत बड़ी आयु वाले मूर्ख पुत्र की अपेक्षा पैदा होते ही मर गया पुत्र अच्छा है क्योंकि मरा हुआ पुत्र कुछ समय ही  कष्ट देगा परंतु मोर जीवन भर माता-पिता को कष्ट ही देता रहेगा

 

 गोरेगांव का बास झगड़ालू स्त्री ने स्कूल की सेवा बुरा भोजन मूर्ख लड़का विद्या कन्या यह 6 बिना अग्नि के बीच शरीर को जला देते हैं

 

उस गाय से क्या लाभ जो ना बच्चा दे और ना ही दूध पर ऐसे पुत्र से क्या लाभ जो ना तो विद्वान हो और ना ही किसी देवता का भक्त हो Chanakya niti in hindi

 

 

इस संसार में दुखों से दग्ध प्राणी को तीन बातों से शांति व सुख प्राप्त हो सकता है सुपुत्र से पतिव्रता स्त्री से औषध संगत से या सत्संगति से अच्छे लोगों का साथ करने से 

 

राजा लोग एक ही बार बोलते हैं पंडित लोग किसी कर्म के लिए एक ही बार बोलते हैं कन्या भी एक ही बार दी जाती है इन तीनों चीजों का महत्व केवल एक बार करने में ही होता है

 

तपस्या अकेले में अध्ययन दो के साथ गाना 3 के साथ यात्रा चार के साथ खेती 5 के साथ और युद्ध बहोतो की सहायता से ही उत्तम होता है

 

पत्नी वही जो पवित्र और चतुर हो पत्नी वही जिस पर पति का प्रेम हो पत्नी वही जो सदैव सत्य बोलती हो बिना पुत्र के घर सुना है बिना बंधुओं के दिशाएं सुनी है मूर्ख का हृदय भावों से सुना है दरिद्रता सबसे सुनी है और दरिद्रता जीवन में महा कष्ट देने वाली है

 

बार-बार अभ्यास ना करने से विद्या विश्व बन जाती है बिना बचा हुआ भोजन मिस बन जाता है दरिद्र के लिए स्वजनों की सभा और वृद्धों के लिए युवा स्त्री विष के समान होती है

 

 

दया हिन धर्म को छोड़ देना चाहिए विद्या हीन गुरु को छोड़ देना चाहिए झगड़ालू और क्रोधी स्त्री को छोड़ देना चाहिए और स्नेह वहींन बंधुओं को भी छोड़ देना चाहिए Chanakya niti in hindi

 

 

बहुत ज्यादा पैदल चलने से मनुष्य को बुढ़ापा आ जाता है घोड़े को एक ही स्थान पर बांधे रखने से और स्त्रियों के साथ पुरुष का समागम ना होने से और वस्त्रों को लगातार धूप में डालने से शीघ्र ही उन्हें बुढ़ापा आ जाता है

 

 

बुद्धिमान व्यक्ति को बार-बार यह सोचना चाहिए कि हमारे मित्र कितने हैं हमारा समय कैसा है समय यदि बुरा है तो उससे अच्छा कैसा बनाया जाए हमारा निवास स्थान कैसा है सुखद है तो खत है हमारी आय कितनी है और हमारा खर्च कितना है मैं कौन हूं आत्मा कौन है शरीर कौन है तथा मेरी शक्ति कितनी है Chanakya niti in hindi

 

 

जन्म देने वाला पिता संस्कार करने वाला उपनयन विद्या देने वाला गुरु अन्नदाता और भैंस से रक्षा करने वाले यह पांच पितृ माने गए हैं

 

राजा की पत्नी गुरु की स्त्री मित्र की पत्नी पत्नी की माता अथवा अपनी जननी यह 5 माताएं मानी गई हैं इनके साथ मात्र जैसा व्यवहार ही करना चाहिए

 

अग्निदेव ब्राह्मणों छत्रिय और भैंसों के देवता हैं ऋषि मुनियों के देवता ह्रदय में है अल्प बुद्धि वालों के देवता मूर्तियों में और सारे संसार को समान रूप से देखने वाले  देवता सभी जगह निवास करते है Chanakya niti in hindi

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