Chanakya niti in hindi pdf - चाणक्य नीति in hindi by hindi me book

 

Chanakya niti in hindi pdf
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Chanakya niti in hindi pdf

आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित एक महान ग्रंथ चाणक्य नीति का अध्ययन आज हम आरंभ करेंगे चाणक्य नीति प्रथम अध्याय और दितीय अध्धाय Chanakya niti in hindi pdf

 Chanakya niti in hindi pdf

दोस्तों चाणक्य नीति भारत भूमि का महान राजनीतिज्ञ चाणक्य के राजनितिक पर बताया जाता है इस बुक में भारत सासन की नीतियों और गुड दोषों पर विचार की गयी है इस बुक में बहोत कुछ राजनीतीक व्यवहारों पर बताया गया है दोस्तों चाणक्य ने चन्द्र गुप्त मोर्य को राजा बनाकर भारत के मोर्य सम्राज्य की नीव डाली थी

 

दोस्तों अगर आप चाणक्य नीति बुक या फिर आप इसके pdf को download करना चाहते है इसका लिंक niche दिया गया है Chanakya niti in hindi pdf

 

चाणक्य के प्रथम या दितीय अध्धाय में क्या बतया गया है यह देख सकते है

 

 

चाणक्य नीति प्रथम अध्याय

 

सर्वशक्तिमान तीनों लोकों के स्वामी श्री विष्णु भगवान को शीश नवाकर में  मैं अनेक शास्त्रों से निकाले गए राजनीतिक तार के तत्व को जन कल्याण हेतु समाज के सम्मुख रखता हूं इस राजनीतिक शास्त्र का विधि पूर्वक अध्ययन करके यह जाना जा सकता है कि कौन सा कार्य करने योग्य है और कौन सा कार्य करने योग्य नहीं है तथा इस कार्य को करने से क्या परिणाम प्राप्त होंगे

 

लोगों के हित कामना से मैं यहां कुछ शास्त्र को कहूंगा जिसके जान लेने से मनुष्य सब कुछ जान लेने जैसा हो जाता है 

 

यहां से चाणक्य के सूत्र आरंभ होते हैं यह सभी सूत्र संस्कृत वाणी में लिखे गए हैं परंतु यहां पर हम इनका उच्चारण या इनका अध्ययन हिंदी भाषा में करेंगे

 

मूर्ख छात्रों को पढ़ाने तथा दुष्ट स्त्री के पालन पोषण से और दुखियों के साथ संबंध रखने से बुद्धिमान व्यक्ति स्वयं भी दुखी हो जाता है 

 

अर्थ शिष्य को कभी भी उपदेश नहीं देना चाहिए गलत आचरण करने वाली स्त्री का पालन पोषण नहीं करना चाहिए और दुखी लोगों के साथ साथ नहीं रहना चाहिए

 

दुष्ट स्त्री छल करने वाला मित्र पलट कर देखा जवाब देने वाला नौकर तथा जिस घर में सांप रहता हो उस घर के निवास करने वाले ग्रह स्वामी की मृत्यु पर संदेह नहीं करना चाहिए

 

विपत्ति के समय काम आने वाले धन की रक्षा करें धन से स्त्री की रक्षा करें और इन दोनों से धन और स्त्री से अपनी रक्षा करें

 

आपत्ती से बचने के लिए धन की रक्षा करें ना जाने कब संकट की घड़ी आन पड़े लक्ष्मी चंचल है संघ से किया गया धन किसी भी समय नष्ट हो सकता है 

 

जिस देश में सम्मान नहीं आजीविका के साधन नहीं बंद हो या परिवार नहीं और विद्या प्राप्त करने के साधन ना हो उस स्थान पर कभी भी निवास नहीं करना चाहिए

 

जहां धनी वैदिक ब्राह्मण राजा नदी और वैसे यह ना हो उससे यह स्थान में 1 दिन भी निवास नहीं करना चाहिए

 

जब जहां जीबीका भाई लज्जा चतुराई और त्याग की भावना यह ना हो वहां के लोगों का साथ कभी भी नहीं देना चाहिए 

 

नौकर को बाहर भेजने पर भाई या बंधुओं को संकट के समय दोस्त को विपत्ति के समय 

 

और अपनी स्त्री को धन नष्ट हो जाने पर रखना चाहिए और इनकी परीक्षा उस समय करनी चाहिए स्त्री की परीक्षा जब पति निर्धन हो जाए नौकर की परीक्षा जब उसको बाजार या बाहर भेजा जाए दोस्त की परीक्षा विपत्ति काल के समय

 

 

बीमारी में विपत्ति काल में अकाल के समय दुश्मनों से दुख पाने या आक्रमण होने पर राज्यसभा राज दरबार में और श्मशान भूमि में जो साथ रहता है वहीं वास्तव में बच्चा भाई या बंधु कहलाने का हकदार है

 

जो अपने निश्चित कर्मों अथवा वस्तु का त्याग करके अनिश्चित की चिंता करता है उसका अनिश्चित नष्ट होना तो तय ही है इसके साथ ही उसका निश्चित भी शीघ्र ही नष्ट हो जाता है

 

एक बुद्धिहीन व्यक्ति को किसी इज्जत दार घर की अविवाहित कन्या से व्यंग होने के बाद भी विवाह नहीं करना चाहिए उसे किसी हीन घर की अत्यंत सुंदर स्त्री से भी विवाह नहीं करना चाहिए शादी विवाह हमेशा बराबर के परिवार या खानदान में ही उचित होती है इन पांच पर कभी भी विश्वास ना करें पहला नदियों पर दूसरा जिस व्यक्ति के हाथों में अस्त्र और शस्त्र हो तीसरा नाखून और सिंह वाले पशु या पक्षी ऊपर चौथा औरतों पर स्त्रियों पर और पांचवा राजघराने के लोगों के ऊपर in5 पर कभी भी भरोसा नहीं करना चाहिए

 

अगर हो सके तो विश्व में भी अमृत निकालने यदि सोना गंदगी में भी पड़ा है तो उसे उठाएं धोने और अपनाएं निचले कुल में जन्म लेने वाले भी सर्वोत्तम ज्ञान को ग्रहण करें उसी तरह यदि कोई बदनाम कर की कन्या भी महान गुणों से संपन्न है और आपको कोई सीख देती है तो भी उसे ग्रहण करना चाहिए

 

महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा भूख दोगुनी होती है लज्जा 4 गुनी साहस 6 गुनी और काम 8 गुनी होता है 

 

 

चाणक्य नीति दूसरा अध्याय 

 

झूठ बोलना उतावलापन दिखाना छल कपट करना मूर्खता अधिक लालच करना और शुद्धता और दया हीनता यह सभी प्रकार के दोष स्त्रियों में स्वाभाविक रूप से ही उपस्थित होते हैं

 

भोजन करने तथा उसे अच्छी तरह पचाने की शक्ति हो तथा अच्छा भोजन समय पर प्राप्त हो प्रेम करने के लिए उत्तम स्त्री के साथ संग हो खूब सारा धन और धन को दान करने का उत्साह हो यह सभी सुख किसी तपस्वी के फल के समान अर्थ कठोर तपस्या करने के बाद ही प्राप्त होते हैं

 

 जिसका पत्र आज्ञाकारी हो स्त्री उसके अनुसार चलने वाली हो जो अपने पास धन से संतुष्ट रहता हो उसका स्वर्ग यही पर वर्तमान समय में ही उपस्थित है

 

 

 पुत्र वह है जो पिता भक्त हो पिता वह है जो बच्चों का पालन पोषण करें मित्र वही जिसे पूरे विश्वास हो और स्त्री वही जिसमें परिवार की सुख और शांति व्याप्त हो

 

जो मित्र प्रत्यक्ष रूप से मधुर वचन बोलता है और अप्रत्यक्ष रूप से अर्थ आपकी पीठ पीछे आपके हर कार्यों में रोड़ा डालता है ऐसे मित्रों को उस घड़े के समान त्याग देना चाहिए जिसके भीतर विश्व भरा होता है और गाड़ी के ऊपरी हिस्से पर दूध होता है

 

अपने मित्र पर भी विश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि इस बात की पूरी पूरी संभावना है जो वर्तमान समय में आपका मित्र है एक समय में यदि वह आपका दुश्मन बन जाए तो वह आपके सारे राज जमाने के सामने प्रकट कर देगा

 

मनसे विचारे गए कार्य को कभी भी किसी को नहीं कहना चाहिए उसे मंत्र की तरह अपने भीतर सुरक्षित रखते हुए अपने कार्य को संपन्न करते रहना चाहिए या अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहना चाहिए

 

निश्चित रूप से मुक्ता दुखदाई है और यौवन भी दुखदाई है परंतु कष्टों से भी बड़ा कष्ट किसी अन्य व्यक्ति के घर पर जाकर लंबे समय तक निवास करना 

 

हर एक पर्वत पर मणि नहीं होता हर एक हाथी में मुक्तामणि नहीं होता साधु लोग सभी जगह पर नहीं मिलते और हर एक वन हर एक वन में चंदन का वृक्ष नहीं पाया जाता

 

बुद्धिमान लोगों का कर्तव्य होता है कि वह अपनी संतान को अच्छे कार्य या व्यापार में लगाएं क्योंकि नीति के जानकार वह सब व्यवहार वाले व्यक्ति ही कुल में सम्मानित होते हैं

 

जो माता-पिता अपने बच्चों को नहीं पढ़ाते और उन्हें शिक्षा प्रदान नहीं करते या करवाते वह उनके सबसे बड़े शत्रु होते हैं

 

ऐसे बालक सभा में उसी प्रकार शोभा नहीं पाते जिस प्रकार हंसों के बीच में बगुला शोभा नहीं पाता

 

अत्यधिक लाड प्यार से पुत्र और शिष्य गुण हीन हो जाते हैं और ताड़ना से गुनी हो जाते हैं अर्थ शिष्य और पुत्र को ताड़का भी वह रहना चाहिए जिससे कि वह गलत मार्ग पर ना चल सके 

 

एक श्लोक आदर्श श्लोक श्लोक का एक चरण उसका आधा अथवा एक अक्षर या आधा अक्षर ही प्रतिदिन जरूर पढ़ना चाहिए

 

स्त्री का वियोग अपने लोगों से अनाचार कर्ज का बंधन दुष्ट राजा की सेवा दरिद्रता और अपने प्रति को सभा यह सभी अग्नि ना होते हुए भी शरीर को जलाने के लिए पर्याप्त हैं

 

नदी के किनारे खड़े वृक्ष दूसरे के घर में गई स्त्री मंत्री के बिना राजा शीघ्र ही नष्ट हो जाते हैं

 

ब्राह्मणों का बल विद्या में है राजाओं का बल उनकी सेना है वेश्याओं का बल उनका धन और शूद्रों का बल सेवा कर्म करने में ही है

 

वेश्या निर्धन मनुष्य को प्रजा पराजित राजा को पक्षी फल रहित वृक्ष को अतिथि उस घर को तत्काल ही छोड़ देते हैं जिसमें वह आमंत्रित किए गए हो और भोजन के भोजन कर चुके हो

 

ब्राह्मण दक्षिणा ग्रहण करके यजमान को विश्व विद्या प्राप्त करने के उपरांत अपने गुरु को और हिरण जले हुए 1 को तत्काल ही त्याग देते हैं

 

दुराचारी के साथ रहने से पाप दृष्टि रखने वाला का साथ करने से तथा अशुद्ध स्थान पर रहने वाले से मित्रता कभी भी नहीं करनी चाहिए

 

मित्रता मित्रता बराबर वालों से ही शोभा पाती है नौकरी राजा की ही अच्छी होती है व्यवहार में कुशल व्यापारी और घर में सुंदर स्त्री स्वभाव पड़ती है

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