2020 में दीपावाली कितनी तारिक को है ? पूरी जानकारी hindi में / deepavali kitni tarikh ko hai

दीपावली कब है 2020
(deepavali kitni tarikh ko hai)



Deepavali kitni tarikh ko hai


नमस्कार मैं vijay आपका आपने hindimebook.com में स्वागत करता हूं और आज के इस पोस्ट में हिंदुओं के एक प्रमुख त्यौहार दीपावली के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं कि आखिर में दीपावली क्यों मनाई जाती है किस दिन दीपक जलाया जाता है कि वह इस दिन लक्ष्मी का पूजन किया जाता है (deepavali kitni tarikh ko hai)

इस तरह की सभी बातें सभी चर्चाएं इस पोस्ट के माध्यम से आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहा हूं तो इस पोस्ट में आप अंत तक बने रहिए तभी आप को संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो पाएगी कि दीपावली क्यों मनाया जाता है और दीपोत्सव का यह त्यौहार क्यों मनाया जाता है दीपावली कब है 2020 (deepavali kitni tarikh ko hai)

दीपावली 2020


भारत एक ऐसा देश है जिसे त्यौहारों की भूमि कहा जाता है हिंदू मान्यता के अनुसार कुल 33 कोटि देवी देवता हैं इस प्रकार से देखें तो हमेशा किसी न किसी त्योहार का माहौल बना ही रहता है इन्हीं त्यौहारों इन्हीं पदों में से एक खास पर्व है जो दीपावली के नाम से जाना जाता है और जो दशहरा के ठीक 20 दिन बाद मनाया जाता है  दीपावली 2020 (deepavali kitni tarikh ko hai)

इस देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन दीपावली क्यों मनाई जाती है आखिर क्या कारण है कि जिस से दीपावली को दीप जलाया जाता है और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है 

यह सबसे बड़ी बात है तो हम आपको कुछ रोचक बातें बताने जा रहे हैं जिसके आधार पर दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है दीपावली कब है 2020

दीपावली और दीप उत्सव मनाने के पीछे कई कहानियां प्राप्त होती है लेकिन उन्हें कहानियों में से उन्हीं तत्वों में से हम पांच तत्वों को चुन करके आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं जो कि सर्वमान्य है  (deepavali kitni tarikh ko hai)


इन पांच में से तीन हिंदू समुदाय से एक सिख समुदाय से और एक जैन समुदाय से संबंधित है तो आइए हम एक-एक करके सभी कथाओं को सभी कारणों को जानते हैं कि आखिर दीपावली क्यों मनाई जाती है दीपक क्यों जलाया जाता है और माता लक्ष्मी का पूजा क्यों किया जाता है (deepavali kitni tarikh ko hai)

दीपावली का त्यौहार कियु मनाया जाता है


सबसे पहले यह जान लेते हैं कि दीपावली का त्यौहार कब मनाया जाता है जी हां दीपावली का त्यौहार दीपोत्सव का यह त्यौहार कार्तिक अमावस्या को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है जान लेते हैं दीपावली क्यों मनाई जाती है (deepavali kitni tarikh ko hai)

दीपावली मानाने का पहला वजाह क्या है


पहली कहानी जुड़ी हुई है भगवान श्री रामचंद्र जी से त्रेता युग में जब भगवान श्री रामचंद्र को 14 वर्ष का वनवास हुआ उस दौरान वह 14 वर्ष में अनेक यात्राओं को झेलते हुए लंका पहुंचे वहां पर लंकापति रावण का वध करने के बाद भगवान श्री रामचंद्र कार्तिक अमावस्या को ही अयोध्या लौटे थे इस अवसर पर समस्त अयोध्यावासी भगवान श्री राम के नगर वापसी पर खुशी मनाते हुए घी का दीपक जलाए थे तब से दीपावली का पर्व मनाया जाने लगा है

दीपावली मानाने का दूसरा वजाह क्या है


दूसरी कथा जुड़ी हुई है समुद्र मंथन से समुद्र मंथन के समय कार्तिक अमावस्या को ही छीर सागर से महालक्ष्मी उत्पन्न हुई थी और भगवान् श्री हरी विष्णु जी और माता लक्ष्मी का विवाह संपन्न हुआ था तभी से दीपावली का त्यौहार मनाते हुए माता लक्ष्मी का पूजन किया जाता है माता लक्ष्मी धन की देवी है इसलिए हर घर में दीप जलाने के साथ साथ माता लक्ष्मी का भी पूजन अर्चन किया जाता है जिससे कि उस घर में माता लक्ष्मी का सदा निवास सदा वास बना रहे

दीपावली मानाने का तीसरी वजाह क्या है


तीसरी घटना भगवान श्रीकृष्ण से जुडी हुई है द्वापर युग में एक राक्षस नरकासुर हुआ करता था वह बहुत ही अत्याचारी था आप एक बार बस 16000 युवतियों का अपहरण कर लिया था तब भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध किया और उन 16000 युवतियों को नरकासुर से मुक्त कराया था वह दिन भी कार्तिक अमावस्या का ही दिन था कृष्ण भक्ति धारा के लोग इसी दिन को दीपावली के रुप में मनाते हैं

दीपावली मानाने का चोथी वजाह क्या है


चौथी कहानी जुड़ी हुई है सिख समुदाय से एक बार की बात है जब मुगल बादशाह जहांगीर ने 52000 राजाओं को ग्वालियर के किले में बंदी बना कर के रखा था उस दौरान सिखों के छठे गुरु हरगोविंद सिंह ने अपनी सूझबूझ एवं अपनी बुद्धिमानी से उन 52000 राजाओं को जहांगीर के कैद से मुक्त कराया था तभी से सिख समुदाय भी दीपावली का यह त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाने लगे

दीपावली मानाने का पांचवा वजाह क्या है


पांचवी कथा जैन धर्म से जुड़ी हुई है जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी को कार्तिक अमावस्या की रात को ही निर्वाण की प्राप्ति हुई थी और इसी दिन भगवान महावीर के प्रमुख गणधर गौतम स्वामी को कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी दीपावली कब है 2020


इसीलिए दीप और रोशनी के त्योहार दीपावली को जैन धर्म के लोग भी बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं जैन ग्रंथों के अनुसार पर भगवान महावीर स्वामी ने दीपावली वाले दिन अर्थात कार्तिक अमावस्या के दिन मुफ्त में जाने से पहले आधी रात को अंतिम रूप दे दिया था (deepavali kitni tarikh ko hai)

जिसे उत्तरा ध्यान सूत्र के नाम से जाना जाता है भगवान महावीर स्वामी के मुफ्त में जाने के बाद वहां मौजूद जैन धर्मावलंबियों ने दीपक जलाकर के रोशनी करते हुए खुशियां मनाई थी जैन धर्म के लिए यह त्यौहार विशेष रूप से त्याग और तपस्या के त्यौहार के तौर पर मनाया जाता है

भगवान महावीर स्वामी पूजन विशेष रूप से करते हैं और उनके त्याग और तपस्या को याद करते हैं सभी जैन मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है

 इस तरह से इन पांच बिंदुओं को ही आधार मानकर के इस त्यौहार को इस दीपावली के त्यौहार को इस दीपोत्सव को बड़े ही धूमधाम से भारत वर्ष में ही नहीं अपितु देश विदेश में भी मनाया जाता है (deepavali kitni tarikh ko hai)

जो कि पूरे हर्षोल्लास का त्यौहार होता है इस दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं बच्चे पटाखे फोड़ते हैं और माता लक्ष्मी का विशेष पूजन अर्चन करके उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास किया जाता है

दीपावली के दिन किसकी पूजा होती है 


दीपावली के दिन माता लक्ष्मी के पूजन के अलावा भगवान श्री गणेश एवं कुबेर जी का भी पूजन अर्चन किया जाता है भगवान श्री गणेश बुद्धि के देवता हैं  (deepavali kitni tarikh ko hai)

इसलिए हम भगवान श्री गणेश के सामने नतमस्तक होकर के हम से प्रार्थना करते हैं कि हमें सदैव सद्बुद्धि के मार्ग की ओर ले चलें और कुबेर जी धन के देवता होने के कारण कुबेर का पूजन किया जाता है 

जिससे कुबेर जी की कृपा दृष्टि हम पर बनी रहे और धन संपदा प्रचुर मात्रा में हमारे पास भरा रहे हमारा भंडार भरा रहे

दीपावली मनाने की कितनी कथंये है 


इस तरह से आपके सामने दीपावली मनाने के 555 कथाएं प्रस्तुत की गई लेकिन दीपावली मनाने के लिए जो भी कथा हो जो भी तथ्य हो लेकिन यह बात निश्चित है कि दीपक आनंद प्रकट करने के लिए जलाए जाते हैं खुशियां बांटने का काम करते हैं (deepavali kitni tarikh ko hai)

भारतीय संस्कृति में दीपक को सत्य एवं ज्ञान का सूचक माना जाता है क्योंकि दीपक स्वयं जलता है लेकिन दूसरों को प्रकाश देता है दीपक की इसी विशेषता के कारण धार्मिक ग्रंथों में दीपक को ब्रह्म स्वरूप माना गया है 

ऐसी मान्यता है कि दीपदान से शारीरिक एवं आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है जहां सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंच पाता है वहां दीपक का प्रकाश पहुंच जाता है दीपक को सूर्य का भाग सूर्या संभव हो दीपक कहा जाता है

स्कंद पुराण के अनुसार दीपक का जन्म यज्ञ से हुआ था

यज्ञ देवताओं एवं मनुष्य के मध्य संवाद साधने का एक माध्यम है यज्ञ की अग्नि से जन्मे इस दीपक का पूजन विशेष महत्वपूर्ण होता है विशेष फलदायक होता है (deepavali kitni tarikh ko hai)

इसलिए आपसे एक विनती करता हूं कि दीपावली के दिन आप अपने घर में मिट्टी का बना हुआ दीपक जलाएं दीपक चाहेगी का हो चाहे तेल का हो लेकिन मिट्टी का दीपक जी अपने घर में प्रज्वलित करें बाजार में बिकने वाली इलेक्ट्रॉनिक लाइट को अपने घर में ना जाएं और अपने देश का हित सोचे

इस वर्ष दीपावली के पूजन का क्या मुहूर्त है कितने समय आपको पूजन करना है उसकी जानकारी भी मेरे इस wrebsite पर उपलब्ध कराई जाये गी  

जिससे कि आपको पूजन का मुहूर्त मालूम चल सके और आप सही समय पर पूजन अर्चन कर सकें / दीपावली कब है 2020

आशा करता हूं कि यह जानकारी आपको पसंद आई होगी और यदि यह जानकारी आपको पसंद आई होगी तो अन्य लोगों तक भी इस जानकारी को पहुंचाते है class 12th notes


ताकि वे भी इस जानकारी से अवगत हो सकें और यदि आप चाहते हैं कि मेरे द्वारा ऐसे ही ज्ञानवर्धक बातें आपको बताया जाए तो मेरे इस वेबसाइट hindimebook.com के साथ बने रहिये (deepavali kitni tarikh ko hai)

जय हिंद जय भारत जय माता दी जय लक्ष्मी माता

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