2020 gandhi jayanti speech in hindi / महात्मा गाधी जयंती पर भाषण / hindimebook

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2020 gandhi jayanti speech in hindi


दोस्तों अज्ज हम इस पोस्ट जानने वाले है  2020 gandhi jayanti speech in hindi2 october speech in hindi, gandhiji ki kahani, mahatma gandhi history in hindi, about gandhi jayanthi in hindi के बारे में 

दोस्तों आज हम एक आजाद भारत में सांस लेते हैं क्योंकि अंग्रेजों से हमें 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली थी और दोस्तों देश को आजाद कराने के लिए ना जाने कितने ही लोगों ने अपना जीवन तक निछावर कर दिया था हालांकि यहां भी आजादी के लिए लड़ने वाले खास कर दो अलग-अलग विचारधाराओं में बंटे हुए थे जिनमें से एक तरफ तो वो लोग थे जो कि आजादी को अपनी ताकत के दम पर जीना चाहते थे

तो वहीं कुछ लोग शांति पूर्वक अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए आजादी हासिल करना चाहते थे और दोस्तों इन्ही आंतकवादी लोगों में से एक थे राष्ट्रपिता कहे जाने वाली मोहनदास करमचंद गांधी  2020 gandhi jayanti speech in hindi

जीने हम आमतौर पर महात्मा गांधी के नाम से जानते हैं और दोस्तों गांधीजी भारतीय इतिहास के वह व्यक्ति हैं जिन्होंने देश हित के लिए अंतिम सांस तक लड़ाई की है और उन्हें की तरह ही हजारों वीरों की वजह से हमारा देश 1947 में आजाद हो सका था  gandhi jayanti speech in hindi


दोस्तों इस पोस्ट में हम भारत के सबसे लोकप्रिय लोगों में से महात्मा गांधी के जीवन के बारे में जाने गे

कि किस तरह से आखिर अहिंसा के मार्ग पर चलने वाली गांधी जी ने अंग्रेजी हुकूमत को हिलाकर रख दिया था

तू तो एक कहानी की शुरुआत होती है 2 अक्टूबर 1869 से

जब गुजरात के पोरबंदर शहर में महात्मा गांधी जी का जन्म हुआ

उनके पिता का नाम करमचंद गांधी और मां का नाम पुतलीबाई था

हालांकि भले ही गांधीजी पोरबंदर शहर में पैदा हुए थे लेकिन जन्म के कुछ साल बाद उनका पूरा परिवार राजकोट में रहने लगा

और फिर गांधीजी के शुरुआती पढ़ाई
और दोस्तों 7 साल की उम्र में पहली बार स्कूल जाने वाले गांधीजी शुरू से ही काफी शर्मीले थे

और वह बचपन से किताबों को अपना दोस्त मानते थे
और फिर आगे चलकर महज 13 साल की उम्र में उनकी शादी उनसे 1 साल बड़े लड़के कस्तूरबा से हो गई

दरअसल भारत में उस समय साथिया काफी छोटी उम्र में ही हो जाया करती थी हालांकि आगे चलकर जब गांधीजी करीब 15 साल के थे

तब उनके पिता का निधन हो गया और पिता के निधन के 1 साल बाद ही गांधीजी की पहली संतान भी हुई लेकिन दुर्भाग्य से जन्म के कुछ समय बाद ही बच्चे की मृत्यु हो गई

और इस तरह से गांधी जी के ऊपर मानव दुखों का पहाड़ टूट पड़ा लेकिन कठिन परिस्थितियों में भी दादी जी ने खुद को संभाला और फिर 1837 में अहमदाबाद से उन्होंने हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की और फिर आगे चलकर कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद से माल जी दवे जोशी जी के सलाह पर गांधी जी ने लंदन जाकर लॉ की 

हालांकि अट्ठारह सौ अट्ठासी में गांधीजी दूसरी बार पिता बने और इसी वजह से उनकी मां नहीं चाहती थी कि वह अपने परिवार को छोड़कर कहीं दूर जाए

लेकिन कैसे भी करके उन्होंने अपनी मां को मनाया और फिर 4 सितंबर अट्ठारह सौ अट्ठासी को लंदन पढ़ाई के लिए चलेंगे

और फिर 1891 में पढ़ाई पूरी करके वह अपने वतन भारत वापस आ गए हालांकि विदेश में पढ़ाई करने के बावजूद भारत आने पर उन्हें नौकरी के लिए काफी भागदौड़ करनी पड़ी और फिर 1893 सादातुल्लाह कंपनी ने भारतीय कंपनी में नौकरी के लिए उन्हे साउथ अफ्रीका जाना पड़ा

और दोस्तों साउथ अफ्रीका में बिताए गए साल गांधी जी के जीवन के सबसे कठिन समय में से क्योंकि वहां पर उन्हें भेदभाव का काफी सामना करना पड़ा कि इन्हीं भेदभाव ने उन्हें इतना सक्षम बना दिया केवल लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार रहते थे

और 2 साल के लिए साउथ अफ्रीका भेजा गया था लेकिन बाहर रह रहे भारतीयों और आम लोगों के हक के लिए लड़ते रहे और इसी दौरान उन्होंने नटाल इंडियन कांग्रेस की स्थापना की थी और दोस्तों अफ्रीका में रहते हुए दादी जी ने किन इधर सिविल राइट्स एक्टिविस्ट के रूप में खुद की पहचान बना ली

और फिर गोपाल कृष्ण गोखले इंडियन नेशनल कांग्रेस के सीनियर लीडर थे उन्होंने कहा थी जिसे भारत वापस आकर अपने देश को आजाद करवाने के लिए लोगों की मदद करने की बात कही

और फिर इस तरह से 1915 में गांधी जी भारत वापस आ गए और फिर जाकर उन्होंने इंडियन नेशनल कांग्रेस ज्वाइन करके भारत की आजादी में अपना सहयोग शुरू कर दिया

और दोस्तों भारत के अंदर कुछ सालों में लोगों के चहेते बन गए और फिर हिंसा के मार्ग पर चलते हुए उन्होंने भारत के लोगों में एकता की झुन्ड में उन्होंने अलग-अलग धर्म और जाति के लोगों को एक साथ लाने का काम किया और गांधी जी ने असहयोग आंदोलन चलाया जिसके तहत भारतीय आंदोलन काफी सफल साबित हो रहा था

गाँधी जी को इसमें 2 सालों के लिए जेल भेज दिया गया

हालांकि गांधी जी के जेल जाने पर लोगों के अंदर और भी गुस्सा आ गया जिसकी वजह से पूरा भारत अब एक होने लगा था gandhi jayanti speech in hindi

और फिर इसी कड़ी में ही मार्च 1930 में दांडी यात्रा को भी अंजाम दिया गया जिसमें कि 60000 लोगों की गिरफ्तारी हुई

और फिर ऐसे ही आगे पीछे के नेतृत्व में क्विट इंडिया मूवमेंट की तरह ही कहीं और भी आंदोलनों को अंजाम दिया जाता रहा और इस दौरान गांधी जी के बहुत बार गिरफ्तारी दी थी

लेकिन वह तो महात्मा गांधी के द्वारा लगाई गई चिंगारी आप लोगों के भीतर आग बंद कर जलने लगी थी और यही वजह थी कि गांधी जी के साथ था 

बाकी क्रांतिकारियों ने मिलकर 1947 में देश को आजाद कराने में अहम रोल अदा किया और फिर 15 अगस्त 1947 को हमारा भारत देश आजाद हो गया

हालांकि अभी देश के अंदर आजादी का जश्न चल ही रहा था तभी 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गांधी जी की गोली मारकर हत्या कर दी

और फिर इस घटना ने ना सिर्फ देश में बल्कि पूरी दुनिया में फैला दिया 15 नवंबर 1949 गांधी जी के हत्यारे नाथूराम को फांसी दे दी गई

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2 अक्टूबर खास बहुत है, इसमें है इतिहास छुपा
इस दिन गांधी जन्म तिथि है, दिया उन्होंने ज्ञान नया

सत्य अहिंसा को अपनाओ, इनसे होती सदा भलाई
इनके दम पर गांधीजी ने, अंग्रेजो की फौज भगाई

इसी दिन लाल बहादुर जी भी, इस दुनिया में आए थे
ईमानदार और सबके प्यारे, शास्त्री जी कहलाए थे

नहीं भुला सकते हैं इस दिन को, यह दिन है बहुत महान
इसमें भारत का गौरव है, इसमें तिरंगे की है शान

इसमें भारत का गौरव है इसमें तिरंगे की है शान
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Gadhiji ki गीत क्या था


रघुपति राघव राजा राम
पतित पावन सीताराम

सीताराम सीताराम
भज प्यारे तू सीताराम

रघुपति...

ईश्वर अल्लाह तेरे नाम
सबको सन्मति दे भगवान
रघुपति....

रात को निंदिया दिन को काम
कब भजोगे प्रभु का नाम
करते रहिए अपने काम
लेते रहिए हरि का नाम

रघुपति......

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gandhiji ki kahani


माननीय मुख्य अतिथि आदरणीय अध्यापक गण अभिभावकों और यहां उपस्थित मेरे सभी दोस्तों को मेरा नमस्कार 

जैसा कि हम जानते हैं आज 2 अक्टूबर हैं जो कि महात्मा गांधी जी का जन्मदिन है 
और हम सब यहां गांधी जयंती मना रहे है

मेरा नाम विजय है और आज मैं महात्मा गांधी के बारे में दो शब्द कहूंगा सबसे पहले मैं अपने शिक्षक दीपक सर का धन्यवाद देना चाहूंगा 

जिन्होंने मुझे आज इस मौके पर अपना विचार आप लोगों के साथ साझा करने का अवसर मिला 

गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था पर वो बापू के नाम से ज्यादा प्रसिद्ध थे

उन्हें राष्ट्रपिता भी कहा जाता है उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर गुजरात में हुआ था 

उनके पिता का नाम करमचंद गांधी था जो राजकोट के दीवान थे
और यह गुजरात में स्थित हैं

और उनकी माता का नाम पुतलीबाई था

महात्मा गांधी बचपन में साधारण बच्चों की तरह ही थे

उन्होंने 7 वर्ष की आयु में विद्यालय जाना शुरु किया उनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा गांधी था

जिसका विवाह गांधी जी से 13 वर्ष की आयु में हुआ था

गांधीजी अपना 10वीं और कॉलेज की पढ़ाई पूरा करने के बाद कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चले गए कानून की पढ़ाई पूरा करने के बाद वे वापस अपने मातृभूमि लौट आए

गांधीजी स्वतंत्रा आंदोलन के सबसे महान नेता थे जिन्होंने आजादी के लिए कई संघर्ष किए उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ महान और ऐतिहासिक आंदोलन शुरू किया

जिसे हम सत्याग्रह आन्दोलन कहते हैं

और 1942 में उन्होंने एक और आंदोलन शुरू किया जिसका नाम भारत छोड़ो आंदोलन था 

यह आंदोलन भी अंग्रेजों के खिलाफ चलाया गया था

इसका उददेश अंग्रेजों को भारत से भगाना था

और अंत में उनके सफल नेतृत्व में देश को अंग्रेजों से 15 अगस्त 1947 को आजाद कर लिया गया

अतः अंग्रेज भारत छोड़ दिए आजादी के बाद गांधीजी नोआखाली एक दौरे पर गए

जहां हिंदू मुस्लिम लड़ाई चल रही थी

यह जानकर गांधी जी को बहुत दुख हुआ

वो सोचने लगे कि आखिर हम आपस में क्यों लड़ते हैं हम सब को एक साथ रहना चाहिए

उन्होंने सभी से आग्रह किया कि सभी देशवासी आपस में प्रेम पूर्वक रहे

उन्होंने कुछ दिन तक वहां अनशन भी किया और दुर्भाग्यवश वे ज्यादा दिन जीवित नहीं रह पाए

30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे नामक व्यक्ति ने गांधी जी की गोली मारकर हत्या कर दी

उनकी समाधि राजघाट दिल्ली में स्थित है 

और इसी के साथ में अपनी वाणी को विराम देता हूं 

जय हिंद जय भारत

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नमस्कार दोस्तों जैसा कि आप सब जानते हैं कि हम सब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्मदिन प्रतिवर्ष 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के रुप में मनाते हैं 

दोस्तों युगपुरुष गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी है 

इनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था 

इनके पिता का नाम करमचंद गांधी का माता का नाम पुतलीबाई था 

गांधी जी ने इंग्लैंड विश्वविद्यालय से बैरिस्टर की उपाधि प्राप्त की कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1915 में वह भारत लौटे और भारत की आजादी के आंदोलन में भाग लेना शुरू किया

महात्मा गांधी जी सत्य अहिंसा के पुजारी थे 

उनके द्वारा किए गए ऐसे कई कार्य हैं जिनसे सभी को शिक्षा मिलती है 

गांधी जी एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने देश की जनता को विश्वास दिलवाया कि यह स्वतंत्रता की लड़ाई सब की लड़ाई है 

एक छोटा सा योगदान भी देश की आजादी के लिए अहम हिस्सा है 

इस तरह से देश की जनता ने स्वतंत्रता की लड़ाई को अपनी लड़ाई बनाया और एकजुट होकर कई वर्षो की गुलामी की बेड़ियों को तोड़ दिया 

बापू के सथा सभी स्वतंत्रता सेनानियों की संघर्षपूर्ण प्रयासों के कारण ही भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्त करने में सक्षम हो पाया 

30 जनवरी 1948 को शाम के समय जब गांधीजी प्रार्थना सभा के लिए जा रहे थे तभी नाथूराम गोडसे नामक व्यक्ति ने उनकी क्या कर दें 

जिससे सभी भारतवासी शोक में डूब गए गांधी जी ने अपना सारा जीवन राष्ट्र हित में समर्पित किया था 

उनके इस देश प्रेम को हम भारतवासी कभी भी भूल नहीं सकते हैं 

इसलिए प्रतिवर्ष उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए उनके जन्मदिन को गांधी जयंती अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है 

इस दिन महात्मा गांधी जी की समाधि राजघाट पर आयोजित की जाती है और उनका पसंदीदा भक्ति गीत रघुपति राघव राजाराम उनकी याद में गाया जाता है 

हमेशा कहते थे बुरा मत देखो बुरा मत सुनो बुरा मत कहो और उनका यह मानना था कि सच्चाई कभी नहीं मरती उन्होंने अपनी कार्यशैली से ना केवल समूचे जनमानस को प्रेरणा दी बल्कि अपने व्यक्तित्व एवं कार्यों का प्रकाश भारतवर्ष में ही नहीं विश्व भर में फैलाया ऐसे महान राष्ट्रवादी नायक को मेरा कोटि-कोटि नमन 

जय हिंद जय भारत
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